पहले लागू रिकॉर्ड पहचानें
रजिस्टर्ड विलेख और मौजूदा खतौनी साथ रखें। उनमें लिखा जनपद, तहसील, राजस्व गाँव, खाता और गाटा संख्या, क्षेत्रफल तथा नाम नोट करें। शहर का गृहकर खाता या बिजली बिल अलग रिकॉर्ड है; ग्रामीण राजस्व प्रक्रिया हर शहरी मकान या दुकान पर लागू मानकर न चलें। भूखंड का रिकॉर्ड प्रकार स्पष्ट न हो तो स्थानीय तहसील या स्वतंत्र पेशेवर से पूछें।
वर्तमान सरकारी पोर्टल से शुरू करें
vaad.up.gov.in पर RCCMS खोलें और Online Application में धारा 34 नामांतरण का विकल्प देखें। उत्तराधिकार, पैमाइश और भूमि उपयोग परिवर्तन के अलग रास्ते भी हैं; मिलता-जुलता नाम देखकर गलत सेवा न चुनें। पोर्टल का सार्वजनिक नामांतरण पेज धारा 34 को भूमि के नामांतरण के आवेदन का रास्ता बताता है।
आवेदन को बैनामे से मिलाएं
रजिस्ट्री संख्या और तारीख, निबंधन कार्यालय, पक्षकारों तथा जमीन की सही पहचान तैयार रखें। विवरण केवल सरकारी सेवा में भरें और जमा करने से पहले दिखे विलेख तथा भूखंड को जाँचें। विक्रेता के कागज़, बैनामा और खतौनी में नाम, क्षेत्रफल या गाटा संख्या अलग हों तो अंतर लिखें और किसी मान का अनुमान लगाने के बजाय मार्गदर्शन लें।
वाद और बाद की प्रविष्टि देखें
आवेदन की रसीद या कंप्यूटरीकृत वाद संख्या संभालें। RCCMS में वाद की स्थिति, सुनवाई और न्यायालय आदेश खोजे जा सकते हैं। आदेश उपलब्ध होने पर उसे देखें, फिर यूपी भूलेख पर संबंधित खतौनी में की गई प्रविष्टि जाँचें। केवल आवेदन रसीद से रिकॉर्ड बदल जाने की पुष्टि नहीं होती।
समस्या को उसी सौदे के अनुसार सुलझाएं
आपत्ति, बैनामे की प्रविष्टि न मिलना, गाटा के हिस्से की बिक्री या दर्ज क्षेत्रफल का अंतर तहसील और स्वतंत्र कानूनी जाँच माँग सकता है। नामांतरण की स्क्रीन को विलेखों की कड़ी, सीमा और प्रतिबंधों की जाँच का विकल्प न मानें। पोर्टल अस्थायी रूप से न खुले तो कागज़ सुरक्षित रखें और वर्तमान सरकारी प्रक्रिया के लिए संबंधित तहसील से पूछें।
अगला कदम
साफ़ पता के माध्यम से देखी गई शाहजहाँपुर की ग्रामीण प्रॉपर्टी के लिए गाँव, गाटा संख्या और मालिक के उपलब्ध बैनामा व खतौनी विवरण पूछें। खरीदार इन्हीं से आधिकारिक नामांतरण प्रक्रिया और बाद की राजस्व प्रविष्टि जाँचे।
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